April 26, 2012

जो बनना है वही बनिए . . .

हौसले की दौड़ 
मुझे बचपन से ही लिखने का शौक था. इसलिए मैंने ग्रेजुएशन करने  के बाद मीडिया के कोर्स को ज्वाइन किया था. क्लास शुरू होने के तुरंत बाद हकलाहट के कारण मुझे थोड़ी प्रोब्लम होने लगी. टीचर और सहपाठी बोलने लगे तुम यह कोर्स पूरा नहीं कर पाओगे. तुमने एक गलत फील्ड को चुना है. कोई भी मुझे सपोर्ट नहीं करता था. मै निराशा और अवसाद के दौर से गुजर रहा था. और फिर मैंने यह कोर्स छोड़ दिया और मीडिया में करियर बनाने के सपने को अलविदा कह दिया.

२०१० में मै और प्रमेन्द्र इंदौर में टीसा का स्वयं सहायता समूह चला रहे थे, तब हिन्दुस्तान टाईम्स की एक रिपोर्टर अमृता हमारी स्टोरी को कवर करने आईं तो मैंने उन्हें बताया की मै भी मीडिया में जाना चाहता था पर बीच में ही कोर्स छोड़ना पड़ा. इस पर अमृता ने कहा की आप मीडिया में कई तरह के काम कर सकते हैं, उसके लिए बोलना कोई जरूरी नहीं है. आप टीवी पर सिर्फ एक एंकर को बोलते हुए देखते हैं पर उसके पीछे एक पूरी टीम होती है जो स्क्रिप्ट लिखती है और प्रोग्राम बनाती हैं. इस बात को सुनके मुझे दुःख हुआ की काश! उस समय मुझे इस तरह का गाइडेंस मिला होता तो मै मिडिया को कभी अलविदा नहीं कहता. 

वास्तव में हकलाहट के कारण हम लोग यह सोचते हैं की हम फला काम नहीं कर सकते, लेकिन यह सच नहीं है. विदेशों में जब कई खेल प्रतियोगिताएं होती हैं तो वहां पर ऐसे एथलीट शामिल होते हैं जो किसी दुर्घटना में अपने पैर खो चुके हैं और कृत्रिम अंग के सहारे दौड़ जैसी प्रतियोगिता में सामान्य लोगों के साथ भाग लेते हैं और सफल होते हैं. 

मै यह कहना चाहता हूँ की जिन्दगी में कुछ भी असंभव नहीं है. आप जिस भी फील्ड में करियर बनाना चाहें बना सकते हैं और हकलाहट इसमें बाधा नहीं है. साथ ही अगर दूसरे लोग आपको डराने या निराश करने की कोशिश करें तो आप उनकी बातों पर ध्यान ना दें. आपको जो बनना है वही बनिए . . . 

अमितसिंह कुशवाह 
0 9 3 0 0 9 - 3 9 7 5 8 



8 comments:

jasbir singh said...

Well said .Positivity is the key to success. Never let Negativity creep in your mind.There is no power in this world which can stop you in achieving your goals.Try to be an example.

sachin said...

बहुत खूब..

J P Sunda said...

Sahi kaha Amit. Koshish karnae main kya harj. Koshish karkae hi wastwikta ka pata chalta hai, aur yah bhi ki kya sach main hum kya banana chatae hain.

Er. Umesh said...

Mujhe teaching me apna career banana hai..but stammering ki wajah se kai baar man me fear badh jata hai..but apki ish post se mje ek naya positive attitude milega..Thanks for sharing.

sachin said...

@Umesh
हिम्मत मत हारना; अगर मैं हकलाने के बावजूद टीचर बन सका - तो तुम भी यह जरूर कर सकते हो.. बस लगे रहो, पीछे मुड़ के मत देखो.. चलते रहो..

sikander said...

Dear Umesh,
You do what you really want to do. At least give it a try. It's your life and you have to decide what you want to do. Your decision of choosing a career should not be based of the suggestions of others and situations. I do not think stammering can be an obstacle in your dream. During the Delhi SHG
meetings, you explain everything very easily and some times, we treat ourselve as your students and enjoy listening to you. Practice makes a man perfect, if you are choosing teaching, I am sure, you will improve your presentation skill by practice. I know, you are very hardworker.

"STAMMERING ALWAYS SAYS TO US, "WHO SAYS I AM A HINDERANCE IN YOUR CAREER. ACCEPT ME AND TRANSPORM ME INTO YOUR STRENGTH. TAKE ME IN RIGHT PERSPECTIVE AND YOU ARE GOING TO FEEL, IT'S NOT MY WEAKNESS ANY MORE.

WITH REGARDS
SIKANDER

Er. Umesh said...

@ sachin- Thanks sir..your words really give me a support and motivation.
@ Thanks sikander sir..I am glad that I found you as my friend cum inspirational guru. You last lines to transform negative energy in positivity is really wonderful. Thank you very much.

Jitender Gupta Pratham said...

Thanks for sharing a wonderful thought.