July 9, 2013

ऑनलाइन स्वयं सहायता समूह की बैठक सम्पन्न


टीसा के ऑनलाइन स्वयं सहायता समूह की बैठक रविवार 7 जुलाई को स्काइप पर सम्पन्न हुई। इस बैठक में दिनेश सिंह बैंगलौर, अभिषेक कुमार शिमला, प्रेमदीप दिल्ली, विनोद कुमार दिल्ली और अमितसिंह कुशवाह मध्यप्रदेश शामिल हुए।

औपचारिक परिचय के बाद बैठक की शुरूआत स्टोरी टेलिंग से हुई। प्रेमदीप ने तीन दोस्तों की एक कहानी की प्रास्तावना रखी। कहानी में ये तीनों दोस्त घूमने के लिए बाइक से बाहर जाते हैं और एक सूनसान जंगल पर उनकी बाइक पंचर हो जाती है। कहानी में सभी ने अपनी ओर से कुछ लाइन्स जोड़कर उसे आगे बढ़ाया। 

अंत में कहानी एक बहुत ही रोचक मोड़ पर पहुंच जाती है जब तीनो दोस्त आदिवासियों के इलाके में होते हैं और वे लोग उनकी भाषा नहीं जानते। ऐसी हालात में वे उनसे इशारों में बात कर अपनी समस्या को बताते है। और आदिवासी समुदाय के लोग उनकी मदद करते हे। इस प्रकार यह कहानी हमें बताती है कि बेहतर संचार के लिए सिर्फ बोलना ही जरूरी नहीं है बल्कि हम इशारों और भावों के द्वारा भी संचार कर सकते है।

बैठक में टीसा के द्वारा आयोजित होने वाले नेशनल कांफ्रेन्स और नेशनल गेट टू गेदर के बारे में चर्चा की गई। विनोद कुमार, अभिषेक कुमार और दिनेश सिंह ने पूर्व में आयोजित इवेन्टस के अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि इस आयोजन में शामिल होकर उन्हें दूसरे हकलाने वाले व्यक्तियों से मिलने और उनकी सफलताओं को जानने का मौका मिला। यह आयोजन हमें हकलाहट के बारे में एक व्यापक सोच को बढ़ावा देने में कारगर साबित हुआ है।

अगली गतिविधि में सभी ने फोन काल के दौरान हकलाहट को नियंत्रित करने और बेहतर संवाद करने के तरीकों के बारे में अपने अनुभव और जानकारियों को साझा किया। दिनेश सिंह ने बताया कि फोन पर बात करते समय थोड़ी से सर्तकता से हम हकलाहट को नियंत्रित कर सकते हैं। अमित ने कहा कि फोन पर बातचीत करते समय भी स्पीच तकनीक का प्रयोग करने से हम सही और सार्थक संवाद कर पाते हैं, बिना किसी परेशानी के। अभिषेक कुमार ने बताया कि वे अपने कार्यालय कार्य के लिए फोन काल करते समय बिना किसी झिझक और डर के बात करते है। 

बातचीत में आई कान्टेक्ट के महत्व पर भी प्रतिभागियों ने अपने-अपने विचार रखे। सभी ने यह स्वीकार किया कि कम्प्यूनिकेशन में उचित आई कान्टेक्ट का होना बहुत जरूरी है।

बैठक का संचालन विनोद कुमार और अमित ने संयुक्त रूप से किया। अंत में आभार अमित ने माना। 

2 comments:

sachin said...

Very good online meeting..
I am just waiting for women's online meeting to take off now! It can be such a warm & memorable experience - and so convenient too- to meet friends online, discuss and talk with full confidence that no matter how you say it, others will understand ..others will have time for you..
Let us promote the online SHGs as a very cost effective and accessible model for pws who are just 1% and scattered all over..

Anand said...

Hi,

Its gr8 meeting, really you all guys on right path... continue...