April 22, 2013

कार्यशाला सिखाती है जीवन जीना ... !


आज मैं और अनिल गुहार हर्बर्टपुर (देहरादून) वर्कशॉप से वापस लौटकर दिल्ली पंहुचे। इन तीन दिनों में मैंने बहुत कुछ सीखा और जाना। मैं आश्चर्य में हूँ की तीन दिनों की कार्यशाला ने गागर में सागर भरने का कार्य किया है। नए लोगों से मिलकर और उनके अनुभव सुनकर मन एक नई उड़ान भरने लगा है।

जीवन में अचानक एकदम से इतना बड़ा बदलाव मैं महसूस करूँगा, इसकी मैंने कल्पना तक नहीं की थी। हकलाहट पर सचिन सर के अनुभव, उनका हमेशा उर्जावान, सक्रिय और सकरात्मक बने रहना हम सभी को प्रेरणा देता है की हम जो चाहें हासिल कर सकते हैं। वहीँ जसबीर सिंह, डॉ . तेजपाल की सफलता भी हमें पॉजिटिव थिंकिंग अपनाने पर जोर देती है। 

कार्यशाला को अटेंड करके मैंने यह सीखा की स्पीच तकनीक का व्यवहारिक रूप में कैसे इस्तेमाल करना है। हमें कैसे लोगों से बात करना है। इस वर्कशॉप के आख़िरी दिन लघु नाटक की प्रस्तुति ने इस पर विशवास जगाया की हकलाने वाले भी मंच पर प्रभावी प्रस्तुति दे सकते है। 

कार्यशाला के सफल आयोजन पर सचिन सर और हेमंत जी को धन्यवाद, साधुवाद और बधाई ...!

PS : वर्कशॉप की रिपोर्ट संवाद के अगले अंक पर पढ़ें।        

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Amitsingh Kushwah,
SATNA (MP)
Mobile No. 093009-39758

4 comments:

Mayank Harjika said...

Amit Singh Kushwah you are absolutely right and i am totally agree with u. After doing these small small activities have bring big big changes in our life.

हेमन्त कुमार "हृदय" said...

कुशवाहा जी, workshop मे शामिल होने के लिये शुक्रिया । आप की presence ने चार चाँद लगा दिये ।

jasbir singh said...

I have one message to convey to all the participants i.e. keep the fire burning. Stammering per hamesha kaam karte rahe. Yahi success ka mool mantra hai.

lalit said...

yes amit ji ..every workshop gives us motivation and they are like energy boaster ....but at same time we need to find more energy boaster to walk in recovery path .......