March 26, 2013

लोगों की हंसी मुझे मज़बूत बनाती है ...!!!



होली में कई रंगों का महत्त्व है, एक रंग से होली का मज़ा बेकार हो जाएगा, वैसे ही समाज के सब सभी लोग एक जैसे नहीं हो सकते। हकलाहट भी इसी तरह की एक भिन्नता है।   

एक दिन PWS दोस्त का मेसेज आया था -

People laugh...
"bcoz I'm different!"
and
I laugh...
"bcoz they are all d same!"
Thats called...
"Attitude"
Live it...!!!

वास्तव में हर वो शख्स जो दूसरों से थोडा अलग है, कुछ अलग करना चाहता है, लोग उसकी हंसी उड़ाते हैं, उसकी राह में बाधा डालने की कोशिश करते हैं, यही इस दुनिया की रीत है, जो सदियों से चली आ रही है. 

कुछ साल पहले तक जब मेरी हकलाहट को देखकर कोई हँसता था तो मुझे बहुत बुरा लगता था, और अब भी ऐसा होता है। फिर भी मैं अब इन सब पर और ऐसे लोगों पर बिलकुल भी ध्यान नहीं देता। साधारण सी बात है की हर आदमी एक जैसा नहीं तो सकता। कई लोग तो मेरा नाम तक याद नहीं रखते लेकिन मेरी हकलाहट के कारण मुझे पहचानते है। मैं इसे एक अच्छे नज़रिए से देखता हूँ की समाने वाला मुझे याद तो रखता है। 

लोगों की हंसी अब मुझे जरा भी विचलित नहीं करती। टीसा ने मुझे वो हौंसला और हिम्मत दी है की अब हकलाहट को खुलकर स्वीकार करने और किसी के हंसने पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

हमारे समाज के हर व्यक्ति में कुछ भिन्नताएं जरूर होती है। दुनिया के कोई भी दो इंसान एक जैसे नहीं हो सकते, यहाँ तक की दो जुड़वां लोगों में भी कई फर्क देखे जाते है। इसलिए इस भिन्नता को सहज रूप में स्वीकार कर आगे बढ़ने का कार्य करना चहिए. 

-- 
Amitsingh Kushwah,
Mobile No. 093009-39758

5 comments:

lalit said...

bahut badiya amit ji ....it seems like u r enjoying ur stammering

Dinesh said...

Happy Holi Amit Ji!! As always your post is filled with real colours :-)

dr vijay singh said...

BAHUT ACHA AMIT JEE,BILKUL SAHI KAHA DUSRO KI HASI HAMEY TAKAT DETY HAI

jasbir singh said...

Apne aap ko thora sa alag swikaar karne ki baat hai. Jis din hum yeh maan lege ki mein aam nahin balki kuch special 1% ki category mein aata hun, oosi din chamatkar ho jayega.
Jaroorat hai apne ko kuch alag manane ki.

Anil said...

अमित जी एक बात बताईये जब पोस्ट को पड़ने वाले लोग हिंदी को इंग्लिश की अपेक्षा अच्छी समझते है,तो इंग्लिश में पोस्ट करने का क्या औचित्य ??