May 2, 2013

एक अनुभव !!

 हाल ही में .सम्पन हुए  Herbertpur.में  आयोजीत  Workshop में  बताये गए   Voluntary Stuttering  Technique  को  हमने ( रवी एवं सुमीत ) अपने स्थानीय शहर के  सार्वजनीक  जगहों  पर बड़े जोश खरोश से आज्माया ...

  हमारे  ज़हन में था और उम्मीद  यही थी की यक़ीनन हमारे हकलाहट का तमाशा बनेगा , और हम दोनों पर व्यंग के तीर कसे जायेंगे ,पर  इस आज्माइश का जो नतीजा नीकला , वो हमारे उम्मीदों से ठीक वीपरीत था ..  लोग हमपे हँसने के बजाए हमारा सहयोग कर  रहे थे , हमारी बातों पर जयादा ध्यान दे रहे थे , लोगो की हमारी हकलाहट पर इस बदली हुई pratikriyā  पर हम दोनों achambhit थे  .

  पर जब एक दुकानदार हमपे हँसा भी, तो हमारे बताने पर की हम हकलाते है , वो हमारे ओर  ज्यादा संवेदनशील हो गए .

 अपने इस आजमाईश उपरांत हमने पाया की  हमारे acceptence से और खुल के हकलाने से हमे लोगो का समर्थन  मीला  और लोगो से बात  करने का डर जाता  रहा .

 Dosto , तो सार यह  की आप खुल के हकलाये , और लोगो के reactions  से और situations के  परीणाम को पहले से ही भापना बंद करे  , और यक़ीनन आप भी हम जैसा हल्का महसूस करने लगेंगे  .

Original content  written provided and most importantly experienced  by  : Ravi Khatri  & Sumeet Vashisth


5 comments:

sachin said...

Thank you Joy! Quick response!

Joy deep Majumder said...

Not faster than Lalit , seemingly his post came in first..he he..:)

हेमन्त कुमार "हृदय" said...

thanks for sharing your experiences. it will motivate others also to try TISA and stammer openly with confidence

sumit vashist said...

vry gud translation DEEP JI or ye padhakar hmara confidence or b jyada badh gya h ye soch kr ki kya hmne sach me aisa hi kiya h.....:-)

हेमन्त कुमार "हृदय" said...

रवी और सुमित जी, आप दोनो ही धन्यवाद के पात्र हो, क्योकि आपने लोगो को अपनी समस्या बताकर सिर्फ़ अपने ही दिमाग से सालों से दबा डर नहीं निकाला है बल्कि समाज में जागरुकता भी फ़ैलायी है और शायद कोई और हकलाने वाला भी टीसा के बारे जान जाये । इस तरह हम अपना ही नही भला कर रहे, बल्कि कई अन्य हकलाने वालों की राह भी आसान बना दे रहे है