April 5, 2012

सुनने की आदत बनाएं . . .

अगर आप अपनी हकलाहट को नियंत्रित कर अच्छा वक्ता बनना चाहते हैं तो सबसे पहले आप दूसरों की बात को धैर्य से सुनने की आदत विकसित करें. इससे आप परिवार और समाज में ज्यादा सम्मानित स्थान प्राप्त करेंगे और आपके दोस्तों, सहयोगिओं, प्रशंसकों की संख्या बढेगी. 

मानव जीवन की यह सबसे बड़ी विडम्बना है की हम हमेशा दूसरों को अपनी बात, अपनी समस्या सुनाना चाहते हैं. उन पर अपनी बात थोपना चाहते हैं. यह समस्या हम हकलाने वालों के साथ ही हो ऐसा नहीं है बल्कि आमतौर पर कई लोग इस कमजोरी के शिकार हैं. 

पिछले दिनों एक हकलाने वाले साथी का फ़ोन आया. रात के ९.०० बज रहे थे और मैं डिनर के लिए जाने वाला था. इस दोस्त ने बात शुरू की और मैं शांत होकर उनकी बात सुनने लगा. हकलाहट के बारे में वे लगातार ३५ मिनट तक बोलते रहे और मैं सिर्फ सुनता रहा और बहुत कम बोला. अंत में इस दोस्त ने मुझसे कहा - "धन्यवाद! आप मुझे बहुत टाइम देते हैं और मेरी बात सुनते हैं."

दोस्त की यह बात सुनकर मैं आश्चर्य में पड़ गया की क्या हम किसी की बात सुनकर और उसे टाइम देकर मदद कर सकते हैं? इस सवाल का जवाब हाँ है...! दूसरों की बात ध्यान से सुनकर न केवल हम खुद की मदद करते हैं बल्कि दूसरे लोगों की भी मदद करते हैं. सुनना बड़े धैर्य का काम है. हम सुनकर ही किसी बात को ठीक से समझ सकते हैं. और सुनने के बाद अगर बोलते हैं तो हमारा बोलना सार्थक हो जाता है. 

कई बार फ़ोन पर या आमने-सामने बातचीत के दौरान हम सिर्फ हाँ... हाँ ... करते रहते हैं और वास्तव में हमारा ध्यान कहीं और होता है. इस आदत से बचना चाहिए. जब हम सुनने की आदत विकसित करते हैं तो हमारे दोस्तों की संख्या बढ़ जाती हैं. 

आपको पता है आजकल कई मानसिक समस्याओं से ग्रसित लोग फीस देकर काउंसलर के पास जाते हैं. वहां पर काउंसलर रोगी की बात को ध्यान से, शांत होकर सुनता है और आखिर में कुछ टिप्स देता है. मुझे लगता है की लोगों को काउंसलर के पास इसलिए जाना पड़ता है क्योकि आज कोई किसी की बात को, परेशानी को, समस्या को ध्यान से सुनकर, सहानुभूति के दो बोल नहीं बोलना चाहता. सबको अपनी सुनाने की पडी है. हद तो तब हो जाती है जब हम फालतू की और बिना सिर-पैर की बातें कर दूसरों के समय को बर्बाद करते हैं. 

अगर आप अपनी हकलाहट को नियंत्रित कर अच्छा वक्ता बनना चाहते हैं तो सबसे पहले आप दूसरों की बात को धैर्य से सुनने की आदत विकसित करें. इससे आप परिवार और समाज में ज्यादा सम्मानित स्थान प्राप्त करेंगे और आपके दोस्तों, सहयोगिओं, प्रशंसकों की संख्या बढेगी. 

जरा सोचिए...! आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिससे आप अपने मन की हर बात, हर समस्या खुलकर कहते हैं? लेकिन क्यों कभी सोचा है? इसलिए क्योकि वह आपकी हर बात ध्यान से सुनता है और आप उससे भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं.    

- अमितसिंह कुशवाह
0 9 3 0 0 9 - 3 9 7 5 8 

4 comments:

sachin said...

एकदम सच॥ हम सुनना इतना मुश्किल पाते हैं कयोंकि हमेँ बचपन से इस बात पे यकीन हो गया है कि बोलना, और धाराप्रवाह बोलना बहुत प्रशंसनीय गुण हैं- सच्चाई तो यह है कि 99% लोग इसका दुरुपयोग ही करते हैं.. जबकि ध्यान से सुनना लोगों का जीवन बदल सकता है..पर इसके लिये थोडी विनम्रता चाहिए !

Dinesh said...

Very good Amit. Through your own personal experience you have explained how important and vital is listening. Thanks and keep going.. Bada accha laga pad ke!

Er. Umesh said...

बहुत अच्छा तरीके से अपने लिखा है .यदि हुम अच्छे से सुन सकते है थो ही हम अच्छे से बोल भी सकते है. अवेसोमे पोस्ट. थैंक्स फॉर शरिंग

GORAV DATTA - HAKLA said...

बहुत सुन्दर ,सुनना वास्तव में बहुत जरुरी है |तुम्हारे लेख बहुत अच्छे होते है |